2030 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा भारत

 2030 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा भारत


नई दिल्ली.
भारत 2022 के अंत तक गगनयान से पहले दो मानवरहित मिशन अंतरिक्ष में भेजेगा। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए सवालों के जवाब में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी दी। सिंह ने कहा, भारत की योजना 2030 तक एक अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की है जो अपनी तरह का अनोखा स्टेशन होगा।
बता दें कि गगनयान मिशन का उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर 2022 तक तीन सदस्यीय दल को पांच से सात दिन की अवधि के लिए अंतरिक्ष में भेजना है। उसी हिसाब से इसरो ने मिशन की योजना बनानी शुरू कर दी थी। इसके तहत पहले मानवरहित मिशन को दिसंबर 2020 में भेजने की योजना बनाई गई थी। हालांकि बीच में कोरोनाकाल के चलते थोड़ी दिक्कतें आईं। इसरो ने भी संकेत दिया था कि कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हुए अवरोधों की वजह से उसका कामकाज प्रभावित हुआ है और कई मिशनों में देरी हो सकती है। जो बड़ी परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, उनमें चंद्रयान-3 और गगनयान हैं।
सूत्रों ने कहा कि मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजने के मिशन की 2022 की समय सीमा का पालन करने के लिए प्रयास जारी हैं। हालांकि दूसरे सूत्र ने कहा, ”हम मानवरहित मिशन को भेजने की दिसंबर 2020 की समय सीमा को पूरा नहीं कर सकेंगे। कोरोना वायरस महामारी ने कई अवरोध पैदा किए हैं।
इसी क्रम में जानकारी देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि मानवरहित मिशन पूरी तरह रोबोटिक होंगे। इनमें से एक अगले साल की शुरूआत और दूसरे मिशन को साल के अंत तक भेजा जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, गगनयान के साथ ही शुक्र मिशन, सौर मिशन और चंद्रयान के लिए भी काम जारी है। कोविड महामारी के कारण विभिन्न मिशन में देरी हुई, लेकिन अब इसके लिए तैयारियां तेजी से शुरू हो गई हैं और चंद्रयान के अगले साल भेजे जाने की योजना है। iiv/ev मिशन के लिए 500 से ज्यादा प्रतिष्ठान शामिल हैं। इसके लिए कई रिसर्च मॉड्यूल बनाए गए हैं, इसमें भारत में निर्मित रिसर्च मॉड्यूल भी शामिल है। बता दें कि गगनयान भारतीय मानवयुक्त अंतरिक्ष यान है। अंतरिक्ष कैप्सूल तीन लोगों को ले जाने के लिए तैयार किया गया है। अपनी पहली मानवयुक्त मिशन में, यह 3।7 टन का कैप्सूल तीन व्यक्ति दल के साथ सात दिनों के लिए 400 किमी की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे।
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niraj

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